ऑपरेशन ब्लू स्टार पर बयान से सियासी हलचल, मंत्री गिरीश महाजन की मौजूदगी से पंजाब की राजनीति गरमाई

ऑपरेशन ब्लू स्टार पर बयान से सियासी हलचल, मंत्री गिरीश महाजन की मौजूदगी से पंजाब की राजनीति गरमाई

Statement on Operation Blue Star sparks political stir

Statement on Operation Blue Star sparks political stir

Statement on Operation Blue Star sparks political stir, ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर दमदमी टकसाल के मुख्यालय में छह जून को आयोजित कार्यक्रम में भाजपा नेता एवं महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन की मौजूदगी ने पंजाब भाजपा और शिरोमणि अकाली दल, दोनों को असहज स्थिति में डाल दिया है। महाजन की यात्रा इसलिए चर्चा का विषय बनी, क्योंकि वह किसी भी राज्य सरकार के पहले मंत्री हैं, जिन्होंने मेहता चौक में होने वाले इस वार्षिक कार्यक्रम में भाग लिया। साथ ही मंच से उन्होंने जो बातें कहीं, वह भी चर्चा का विषय बन गई हैं। यह पहली बार है, जब किसी भाजपा नेता ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान सेना के खिलाफ लड़ने वालों को सार्वजनिक रूप से ‘शहीद’ कहा।

सभा को संबोधित करते हुए महाजन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को ‘आक्रमण’ बताया और 6 जून को इतिहास का ‘काला दिन’ कहा। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने जबरन सेना को स्वर्ण मंदिर परिसर में भेजा था। उन्होंने अभियान में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें शहीद बताया। साथ ही 1984 की सैन्य कार्रवाई की तुलना अहमद शाह अब्दाली के आक्रमणों से की। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नवंबर 1984 में हुई सिख-विरोधी हिंसा का जिक्र करते हुए महाजन ने कहा कि सिखों के साथ हुए अत्याचार अब्दाली के दौर के अन्याय के बराबर थे। उन्होंने अफसोस जताया कि हजारों लोगों की मौत के बावजूद किसी को सजा नहीं मिली।

शिरोमणि अकाली दल आमतौर पर 6 जून के इन कार्यक्रमों से सावधानीपूर्वक दूरी बनाए रखता है। इस वर्ष का आयोजन भी इसी रुख को दर्शाता है। हालांकि, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी कार्यक्रम में शामिल हुए, लेकिन अकाली दल का शीर्ष नेतृत्व और अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज अनुपस्थित रहे।

पंजाब भाजपा के रुख से उलट बोल गये महाजन

कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन की बातें पंजाब भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे रुख के उलट हैं। पंजाब भाजपा 1984 में सेना के खिलाफ लड़ने वाले जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उनके सहयोगियों का महिमामंडन करने या उनकी याद में स्मारक बनाने के प्रयासों का लगातार विरोध करती रही है। वरिष्ठ अकाली नेता भी आमतौर पर मेहता चौक में 6 जून को होने वाले सालाना कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से शामिल होने से बचते रहे हैं।

वैचारिक मतभेद का इतिहास

भाजपा-अकाली दल गठबंधन के दौरान दमदमी टकसाल को लेकर दोनों दलों के वैचारिक मतभेद विशेष रूप से तब सामने आए थे, जब स्वर्ण मंदिर परिसर में 1984 स्मारक को लेकर विवाद हुआ था। उस समय तत्कालीन पंजाब भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने स्मारक पर भिंडरांवाले का नाम शामिल किए जाने का खुलकर विरोध किया था। भिंडरांवाले, दिवंगत मेजर जनरल शबेग सिंह और ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्व नेता अमरीक सिंह के चित्रों से सजे मंच पर महाजन की उपस्थिति और उनके भाषण का समापन ‘जय हिंद’ के साथ करना, मेहता चौक में देखा गया एक असामान्य दृश्य माना जा रहा है। इस यात्रा को बदलते राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।